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जिन वस्तुओं या लोगों का हमारे बहुत करीब होना, उनके प्रति आकर्षण या रुचि में कमी होना।
उसके घर में बहुत सुंदर फूल हैं, मगर पास की चीजें अच्छी नहीं लगती।
उसके घर में सुंदर फूल लगे हैं, परंतु जो फूल उसके बहुत पास हैं, वे उसे उतने अच्छे नहीं लगते।
उसके पास बहुत अच्छे दोस्त हैं, मगर पास की चीजें अच्छी नहीं लगती।
उसके पास बहुत अच्छे मित्र हैं, परंतु जो लोग उसके बहुत करीब हैं, वे उसे उतने अच्छे नहीं लगते।
यह एक सामान्य अनुभवजन्य कहावत है जो मनोवैज्ञानिक अवधारणा 'प्रोक्सिमिटी प्रभाव' (proximity effect) से संबंधित है।
इस वाक्यांश का प्रयोग तब करें जब आप यह व्यक्त करना चाहें कि पास की वस्तुओं या लोगों में वही आकर्षण नहीं है जो दूर की वस्तुओं या लोगों में होता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के पास बहुत सुंदर वस्तुएँ हैं, परंतु वे उसे उतनी अच्छी नहीं लगतीं जितनी दूर की वस्तुएँ।
इस वाक्यांश का प्रयोग केवल उन स्थितियों में करें जहाँ पास की वस्तुओं या लोगों में आकर्षण की कमी हो, न कि सामान्य वस्तुओं या लोगों के लिए।
यह हिंदी का एक सामान्य वाक्यांश है जिसका उद्गम लोक अनुभव और मनोविज्ञान से हुआ है। 'पास' शब्द संस्कृत के 'प्राक्' (पास) से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'निकट'। 'चीजें' शब्द 'वस्तुओं' के लिए प्रयुक्त होता है। 'अच्छी नहीं लगती' में 'अच्छी' का अर्थ 'मनभावन' या 'आकर्षक' है।
इस वाक्यांश का प्रयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहाँ व्यक्ति को अपने आस-पास की वस्तुओं या लोगों में वही आकर्षण नहीं मिलता जो दूर की वस्तुओं या लोगों में होता है। यह मनोवैज्ञानिक अवधारणा 'प्रोक्सिमिटी प्रभाव' (proximity effect) से संबंधित है जहाँ दूर की वस्तुओं या लोगों को देखने या अनुभव करने में अधिक आकर्षण होता है।