दूर के ढोल सुहावने
dūr ke ḍhol suhāvaneयह कहावत दूर की चीजों या स्थितियों को अधिक आकर्षक और सुंदर लगने का भाव व्यक्त करती है। यह आमतौर पर उन चीजों के प्रति आकर्षण को दर्शाती है जो दूर या असुलभ हैं, जबकि वास्तव में वे उतनी अच्छी नहीं हो सकतीं।
उसे दूर के शहर की नौकरी बहुत अच्छी लग रही थी, लेकिन जब वह वहां पहुंची तो उसे पता चला कि वास्तविकता उससे बहुत अलग थी।
वह दूर के ढोल सुहावने लगते हैं, लेकिन जब हम उन्हें पास से देखते हैं तो उनकी वास्तविकता पता चलती है।
यह कहावत अक्सर उन लोगों के लिए उपयोग की जाती है जो दूर की चीजों को अधिक आकर्षक मानते हैं, जबकि वास्तव में वे उतनी अच्छी नहीं हो सकतीं।
शब्द संयोजन
समानार्थी शब्द
विलोम शब्द
संबंधित वाक्यांश
💡विशेष सुझाव
सावधानी बरतें
इस कहावत को याद रखें और दूर की चीजों को बिना सोचे-समझे आकर्षक नहीं मानें।
⚡स्वर्णिम नियम
वास्तविकता का मूल्यांकन करें
दूर की चीजों को आकर्षक मानने से पहले उनकी वास्तविकता का मूल्यांकन करें।
📖शब्द की उत्पत्ति
यह कहावत हिंदी में प्रचलित है और इसका मूल उद्गम लोककथाओं या लोकसाहित्य से जुड़ा हो सकता है।
📝उपयोग नोट्स
इस कहावत का उपयोग अक्सर उन स्थितियों में किया जाता है जहां लोग दूर की चीजों को अधिक आकर्षक मानते हैं, जबकि वास्तव में वे उतनी अच्छी नहीं हो सकतीं।