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किसी बात के पीछे छिपे असली अर्थ या भावना को समझना, जो सीधे तौर पर व्यक्त नहीं किया गया हो।
The email didn’t say anything bad, but if you read between the lines, you’d realize they’re not happy with the project.
ईमेल में कुछ भी बुरा नहीं लिखा था, लेकिन अगर तुम अंदर की बात समझोगे तो तुम्हें पता चलेगा कि वे इस प्रोजेक्ट से खुश नहीं हैं।
He told me everything was okay, but reading between the lines, I think he’s hiding something.
उसने कहा कि सब ठीक है, लेकिन अंदर की बात समझने पर मुझे लगता है कि वह कुछ छुपा रहा है।
इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति के शब्दों के पीछे छिपे असली अर्थ या भावना को समझने की कोशिश की जाती है।
जब कोई व्यक्ति सीधे तौर पर अपनी भावनाओं या असली अर्थ को व्यक्त नहीं करता, तो उसके शब्दों, स्वर और संदर्भ पर ध्यान दें। अक्सर लोग अपनी असली भावनाओं को शब्दों के पीछे छिपा लेते हैं।
कभी भी किसी के शब्दों को बिल्कुल सीधे तौर पर न लें। उसके स्वर, चेहरे के भाव और स्थिति को भी ध्यान में रखें।
इस मुहावरे की उत्पत्ति 18वीं शताब्दी के अंत में हुई थी। इसका पहला लिखित प्रयोग 1796 में अंग्रेजी लेखक थॉमस हार्डी के एक पत्र में मिलता है। मूल रूप से यह मुहावरा लेखन या बोलने में छिपे अर्थ को समझने की अवधारणा से आया है।
इस मुहावरे का प्रयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति के शब्दों के पीछे छिपे असली अर्थ या भावना को समझने की कोशिश की जाती है। इसका प्रयोग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों संदर्भों में किया जा सकता है।