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मनीष ने वेदों का गहन अध्ययन किया है।
यहाँ 'मनीष' का अर्थ है एक विद्वान व्यक्ति जो शास्त्रों का ज्ञान रखता है।
विद्वान व्यक्ति जिसके पास व्यापक ज्ञान हो
मनीष संस्कृत साहित्य में पारंगत हैं।
यहाँ 'मनीष' एक ऐसे व्यक्ति को संदर्भित करता है जो संस्कृत साहित्य का विशेषज्ञ है।
वह एक प्रसिद्ध मनीष थे जिन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की।
यहाँ 'मनीष' का अर्थ है एक विद्वान लेखक या विचारक।
प्रायः धार्मिक, साहित्यिक या दार्शनिक ज्ञान रखने वाले व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है।
'मनीष' का अर्थ है विद्वान व्यक्ति जबकि 'मनीषी' का अर्थ है विद्वान या विचारशील व्यक्ति। दोनों में सूक्ष्म अंतर है।
इस शब्द का प्रयोग केवल उन व्यक्तियों के लिए करें जिनके पास विशेष ज्ञान हो। सामान्य बुद्धिमान व्यक्ति के लिए 'विद्वान' या 'ज्ञानी' शब्दों का प्रयोग करें।
संस्कृत मूल 'मनिष' (मन् + इष) से उत्पन्न, जिसका अर्थ है 'मनन करने वाला' या 'विचारशील व्यक्ति'।
यह शब्द प्रायः सम्मानजनक संदर्भ में प्रयुक्त होता है। इसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जिसके पास गहन ज्ञान हो, विशेषतः धार्मिक, साहित्यिक या दार्शनिक क्षेत्र में।