बाहर राम, भीतर श्याम
व्यक्तित्व में विरोधाभासी गुणों का होनावह बाहर से बहुत विनम्र दिखता है, लेकिन भीतर राम, भीतर श्याम है।
वह दिखावा करता है जैसे भगवान राम हों, लेकिन भीतर से बिल्कुल अलग है।
किसी व्यक्ति के बाहरी व्यवहार और आंतरिक गुणों में अंतर होना, जो एकदम विपरीत हों।
उसका चेहरा मुस्कुराता है, मगर भीतर राम, भीतर श्याम है।
वह मुस्कुरा रहा है, लेकिन उसके मन में बिल्कुल अलग भाव हैं।
राजनेता बाहर से जनता के हितैषी दिखते हैं, मगर भीतर राम, भीतर श्याम है।
राजनेता जनता के सामने अच्छा व्यवहार करते हैं, लेकिन वास्तव में उनके मन में स्वार्थ है।
यह मुहावरा उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बाहरी रूप से अच्छा व्यवहार दिखाते हैं, लेकिन भीतर से बिल्कुल अलग होते हैं।
शब्द संयोजन
समानार्थी शब्द
विलोम शब्द
संबंधित वाक्यांश
विशेष सुझाव
व्यावहारिक उपयोग
इस मुहावरे का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि यह सदैव नकारात्मक अर्थ में प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग उन लोगों के लिए करें जो दिखावा करते हैं।
स्वर्णिम नियम
सही संदर्भ
इस मुहावरे का प्रयोग केवल उन्हीं स्थितियों में करें जहाँ बाहरी और भीतरी गुणों में स्पष्ट अंतर हो।
शब्द की उत्पत्ति
यह मुहावरा संस्कृत और हिंदी साहित्य से लिया गया है, जहाँ 'राम' और 'श्याम' भगवान के नाम हैं। 'राम' को सद्गुणों का प्रतीक माना जाता है, जबकि 'श्याम' (भगवान कृष्ण) को चंचल और रहस्यमयी स्वभाव का। इस प्रकार, यह मुहावरा बाहरी सदाचार और आंतरिक विपरीत गुणों के विरोधाभास को व्यक्त करता है।
उपयोग नोट्स
इस मुहावरे का प्रयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहाँ व्यक्ति बाहरी रूप से अच्छा व्यवहार करता है, लेकिन वास्तव में उसके मन में कुछ और होता है। इसका प्रयोग नकारात्मक अर्थ में किया जाता है।