बात छिपा नहीं सकती
सत्य कभी छुपाया नहीं जा सकतासच्चाई तो बात छिपा नहीं सकती, एक दिन सब सामने आ ही जाती है।
सत्य को हमेशा छुपाया नहीं जा सकता, समय आने पर वह प्रकट हो ही जाता है।
किसी सच्चाई या तथ्य को लंबे समय तक गुप्त नहीं रखा जा सकता।
उसके अपराध की बात छिपा नहीं सकती थी, इसलिए उसने स्वयं स्वीकार कर लिया।
उसके अपराध को वह छुपा नहीं सका, इसलिए उसने खुद कबूल कर लिया।
प्रेम की बात छिपा नहीं सकती, दिल की आवाज़ सब सुन लेते हैं।
प्रेम को छुपाया नहीं जा सकता, क्योंकि दिल की भावनाएँ सबके सामने प्रकट हो जाती हैं।
यह वाक्यांश अक्सर नैतिक या भावनात्मक सच्चाइयों के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है।
शब्द संयोजन
समानार्थी शब्द
विलोम शब्द
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विशेष सुझाव
वाक्य रचना में प्रयोग
इस वाक्यांश का प्रयोग तब करें जब आप किसी ऐसी सच्चाई या भावना की बात कर रहे हों जिसे छुपाया नहीं जा सकता। उदाहरण: 'उसका प्रेम छिपा नहीं सकता था, इसलिए उसने सबको बता दिया।'
स्वर्णिम नियम
सामान्य अर्थ
इस वाक्यांश का अर्थ है कि कोई भी सच्चाई, भावना या घटना लंबे समय तक छुपाई नहीं जा सकती।
प्रयोग का संदर्भ
इसका प्रयोग साहित्यिक, नैतिक या भावनात्मक संदर्भों में किया जाता है, न कि व्यावहारिक या तकनीकी संदर्भों में।
शब्द की उत्पत्ति
यह वाक्यांश संस्कृत के 'सत्यं ब्रूयात्' (सत्य बोलना चाहिए) जैसे आदर्शों से प्रभावित है। 'बात' का अर्थ 'वचन' या 'सत्य' है और 'छिपा नहीं सकती' का अर्थ 'गुप्त नहीं रखा जा सकता' है।
उपयोग नोट्स
इस वाक्यांश का प्रयोग उन स्थितियों में किया जाता है जहाँ किसी सच्चाई, भावना या घटना को लंबे समय तक छुपाया नहीं जा सकता। यह अक्सर साहित्यिक, नैतिक या भावनात्मक संदर्भों में आता है।