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न्यायाधीश ने कहा, 'मुझे दूध का दूध और पानी का पानी चाहिए।'
न्यायाधीश ने स्पष्ट और निष्पक्ष न्याय की मांग की।
ऐसा न्याय या फैसला जिसमें सच्चाई पूरी तरह से सामने आए और पक्षपात या मिलावट बिल्कुल न हो।
अदालत को चाहिए कि वह दूध का दूध और पानी का पानी करके न्याय करे।
अदालत को निर्णय लेते समय पूरी सच्चाई और निष्पक्षता बरतनी चाहिए।
इस मुहावरे का प्रयोग न्यायिक प्रक्रिया या किसी निर्णय में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
इस मुहावरे का प्रयोग तब करें जब आप किसी निर्णय या न्याय में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात कर रहे हों। उदाहरण के लिए, 'अदालत को दूध का दूध और पानी का पानी करके न्याय करना चाहिए।'
इस मुहावरे का प्रयोग मुख्यतः न्यायिक या प्रशासनिक संदर्भों में किया जाता है। व्यक्तिगत जीवन में इसका प्रयोग तब करें जब पूर्ण सच्चाई और निष्पक्षता की आवश्यकता हो।
यह मुहावरा हिन्दी साहित्य और न्यायिक परंपरा से लिया गया है। 'दूध का दूध' और 'पानी का पानी' का शाब्दिक अर्थ है दूध को उसके शुद्ध रूप में और पानी को उसके शुद्ध रूप में अलग करना, जिसमें कोई मिलावट न हो। न्यायिक संदर्भ में इसका प्रयोग पूर्ण सच्चाई और निष्पक्षता को दर्शाने के लिए किया जाता है।
इस मुहावरे का प्रयोग मुख्यतः न्यायिक या प्रशासनिक संदर्भों में किया जाता है। इसका प्रयोग व्यक्तिगत जीवन में भी किया जा सकता है जहाँ पूर्ण सच्चाई और निष्पक्षता की आवश्यकता हो।