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उसने अपने फैसले पर टस से मस नहीं किया।
उसने अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।
अपने विचार या निर्णय में किसी भी प्रकार का बदलाव न करना
उसकी बात सुनकर भी वह टस से मस नहीं हुआ।
उसने उसकी बात सुनने के बाद भी अपना मन नहीं बदला।
माँ ने कहा था कि शाम तक घर आ जाना, पर वह टस से मस नहीं हुई।
माँ के कहने के बाद भी वह शाम तक घर नहीं लौटी।
इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति अपने निश्चय या विचार में दृढ़ रहता है और किसी भी प्रकार के तर्क या दबाव से प्रभावित नहीं होता।
इस मुहावरे का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि यह व्यक्ति के व्यवहार या मनोस्थिति को व्यक्त करता है, न कि भौतिक वस्तुओं के लिए। उदाहरण के लिए, 'उसका मन टस से मस नहीं हुआ' सही है, जबकि 'उसका पेड़ टस से मस नहीं हुआ' अशुद्ध है।
इस मुहावरे का प्रयोग केवल उन्हीं स्थितियों में करें जहाँ व्यक्ति अपने विचार या निर्णय में दृढ़ रहता है। इसका प्रयोग वस्तुओं या अमूर्त विचारों के लिए नहीं किया जाता।
यह मुहावरा 'टस' और 'मस' शब्दों से मिलकर बना है, जो 'टस' (थोड़ा सा हिलना) और 'मस' (थोड़ा सा हिलना) के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। 'टस से मस न होना' का शाब्दिक अर्थ है 'थोड़ा भी हिलना-डुलना नहीं', जो किसी के दृढ़ निश्चय या अटल रहने का प्रतीक है।
इस मुहावरे का प्रयोग व्यक्तियों के संदर्भ में किया जाता है। इसका प्रयोग नकारात्मक या सकारात्मक दोनों संदर्भों में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी के दृढ़ निश्चय की प्रशंसा करते हुए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है और किसी के जिद्दी स्वभाव को व्यक्त करते हुए भी।