जैसा देश वैसा संस्कार
समाज का स्वभाव उसके निवासियों के संस्कारों से मेल खाता हैजहाँ देश में शिक्षा का स्तर ऊँचा है, वहाँ लोगों के संस्कार भी उत्कृष्ट होते हैं।
जहाँ देश में शिक्षा का स्तर ऊँचा है, वहाँ लोगों के व्यवहार और मूल्य भी उच्च होते हैं।
किसी देश या समाज का चरित्र वहाँ के निवासियों के सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों से परिलक्षित होता है।
भारत में विविधता में एकता का संस्कार है, इसलिए यहाँ के लोग मिलनसार और सहिष्णु होते हैं।
भारत की सांस्कृतिक विविधता वहाँ के निवासियों के मिलनसार स्वभाव का कारण बनती है।
अगर देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, तो इसका कारण लोगों के नैतिक मूल्यों में गिरावट है।
समाज का नैतिक पतन ही देश में भ्रष्टाचार का मुख्य कारण होता है।
यह कहावत समाज के नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चरित्र के बीच संबंध स्थापित करती है।
शब्द संयोजन
समानार्थी शब्द
विलोम शब्द
संबंधित वाक्यांश
विशेष सुझाव
स्मरणीय बात
इस कहावत का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि यह समाज के नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चरित्र के बीच संबंध स्थापित करती है, न कि व्यक्तिगत गुणों के बारे में।
स्वर्णिम नियम
उचित संदर्भ
इस कहावत का प्रयोग तब करें जब आप किसी समाज के नैतिक मूल्यों या राष्ट्रीय चरित्र का वर्णन कर रहे हों।
शब्द की उत्पत्ति
यह प्राचीन संस्कृत-हिंदी कहावत है, जिसका मूल अर्थ है 'जैसे देश (समाज) होता है, वैसा ही उसका संस्कार (नैतिक मूल्य) होता है।' इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है जहाँ समाज के नैतिक पतन या उत्थान के कारणों का वर्णन किया गया है।
उपयोग नोट्स
इस कहावत का प्रयोग सामाजिक नैतिकता, राष्ट्रीय चरित्र, या किसी समाज के मूल्यों के वर्णन के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग अक्सर नैतिक शिक्षा या सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में होता है।