ऊँट के मुँह में जीरा
अत्यधिक आवश्यकता के सामने बहुत कम उपलब्धिउसके पास करोड़ों रुपये हैं, मगर जब उसने भूखे लोगों को खाना दिया तो बस एक रोटी ही दी — ऊँट के मुँह में जीरा जैसा लगा।
उसके द्वारा दिया गया योगदान अत्यधिक आवश्यकता के सामने बहुत कम था।
ऐसी स्थिति जहाँ आवश्यकता अथवा माँग बहुत अधिक हो और उपलब्ध संसाधन अत्यंत न्यून हो
उसके पास पैसे तो बहुत हैं, मगर जब उसने गरीबों को मदद दी तो सिर्फ एक कप चाय ही दिया — ऊँट के मुँह में जीरा जैसा लगा।
उसका योगदान अत्यधिक आवश्यकता के सामने बहुत कम था।
इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सहायता उसकी आवश्यकता के सामने बहुत छोटी और अपर्याप्त प्रतीत होती है।
शब्द संयोजन
समानार्थी शब्द
संबंधित वाक्यांश
विशेष सुझाव
मुहावरे का सही प्रयोग
इस मुहावरे का प्रयोग तब करें जब किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सहायता या योगदान उसकी आवश्यकता के सामने बहुत कम प्रतीत होता हो। उदाहरण: 'उसने पैसे तो बहुत दिए, मगर जब बीमारी का इलाज कराना था तो बस कुछ हज़ार रुपये ही दिए — ऊँट के मुँह में जीरा जैसा लगा।'
स्वर्णिम नियम
संदर्भ समझें
इस मुहावरे का प्रयोग केवल उन्हीं स्थितियों में करें जहाँ दी गई वस्तु या सहायता अपर्याप्त हो। इसका प्रयोग सामान्य योगदान के लिए नहीं किया जाता।
शब्द की उत्पत्ति
यह मुहावरा संस्कृत और हिंदी साहित्य से लिया गया है जहाँ ऊँट जैसे विशाल जानवर के मुँह में जीरा जैसा छोटा दाना डालने की कल्पना की गई है, जो उसकी भूख को शांत नहीं कर सकता। इससे यह भाव व्यक्त होता है कि दी गई वस्तु अत्यधिक आवश्यकता के सामने बहुत कम है।
उपयोग नोट्स
इस मुहावरे का प्रयोग आमतौर पर नकारात्मक अर्थ में किया जाता है जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सहायता या योगदान अपर्याप्त प्रतीत होता है। इसका प्रयोग सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत संदर्भों में किया जा सकता है।